राम मंदिर आंदोलन को जनता तक पहुंचाने में, इसे जन आंदोलन बनाने में बीजेपी में सबसे ज्यादा योगदान लालकृष्ण आडवाणी का था. आंदोलन के पीछे आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की रणनीति थी लेकिन उस आंदोलन का चेहरा आडवाणी जी थे. आडवाणी ने राममंदिर आंदोलन को जिस शिखर पर पहुंचाया उसका फल 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर के रूप में देखने को मिला.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजे जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी. पीएम ने बताया कि उन्होंने फोन कर लालकृष्ण आडवाणी को इसके लिए बधाई दी है. पीएम ने अपने सोशल मीडिया पर आडवाणी के साथ एक तस्वीर शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी.
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं. भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है. पीएम ने आगे लिखा कि आडवाणी का जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उप प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का रहा है. उन्होंने गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई.
बीजेपी को ऊंचाइयों पर पहुंचाने में आडवाणी का अहम योगदान
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना से लेकर इस मुकाम पर पहुंचाने में सबसे बड़ा और अहम योगदान लालकृष्ण आडवाणी का है. 1984 में बीजेपी महज दो सांसदों की पार्टी कही जाती थी. जिसे आडवाणी ने अपने राम मंदिर आंदोलन के जरिए ऊंचाइयों पर पहुंचाया. आज बीजेपी संसद में अकेले दम पर सरकार में है. इसके साथ ही हेमंत शर्मा ने कहा कि कि बीजेपी में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता.
आडवाणी अध्यक्षता में राम मंदिर बीजेपी के एजेंडे में हुआ शामिल
1986 में जब पालमपुर अधिवेशन में बीजेपी ने राम मंदिर को अपने आंदोलन एजेंडे में शामिल किया उस समय आडवाणी ही अध्यक्ष थे. उन्हीं की अध्यक्षता में राम मंदिर को एजेंडे में शामिल किया गया. उन्होंने बताया कि आडवाणी राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकार थे. पीछे से भले भी आरएसएस और विश्व हिंदू इस आंदोलन को सपोर्ट कर रहा था लेकिन उसका सार्वजनिक चेहरा लालकृष्ण आडवाणी ही थे.
आडवाणी के आंदोलन का फल 22 जनवरी को मिला
भारतीय जनता पार्टी में दो विचार थे. राम मंदिर आंदोलन के दूसरे नेता अटल बिहारी वाजपेयी थोड़े उदार नेता थे. आडवाणी ने राममंदिर आंदोलन को जिस शिखर पर पहुंचाया उसका फल 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर के रूप में देखने को मिला.
आडवाणी के सबसे करीब पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के बीच रिश्ते को लेकर कहा कि नरेंद्र मोदी बीजेपी में सबसे नजदीक आडवाणी के ही रहे. जब भी गुजरात दंगों को लेकर पीएम असहज हुए या कोई खतरा बना तो आडवाणी हमेशा पीएम के सामने दीवार बनकर खड़े रहे. यही वजह है कि आडवाणी गांधीनगर से लोकसभा के लिए चुने गए और उन्होंने गांधीनगर को ही कार्य क्षेत्र चुना.
आडवाणी की उपेक्षा का आरोप गलत
भारत रत्न का ऐलान प्रधानमंत्री को खुद करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि विपक्ष आडवाणी जी की उपेक्षा का आरोप लगाता था, ऐसे में पीएम के ऐलान के बाद वो आरोप धुलेगा. हेमंत शर्मा ने कहा कि विपक्ष के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे, क्योंकि आडवाणी जी की सेहत काफी समय से खराब थी. वो सक्रिय तौर पर राजनीति में हिस्सा नहीं ले सकते थे, उनकी याददाश्त पर भी असर पड़ा था. ऐसे में उनकी उपेक्षा की बात महज आरोप था. शर्मा ने कहा कि आज बीजेपी उनके योगदान का सार्वजनिक अभिनंदन किया है.
राम मंदिर आंदोलन को जनता तक पहुंचाने में आडवाणी का अहम रोल
राम मंदिर आंदोलन को जनता तक पहुंचाने में, इसे जन आंदोलन बनाने में बीजेपी में सबसे ज्यादा योगदान लालकृष्ण आडवाणी का था. आंदोलन के पीछे आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की रणनीति थी लेकिन उस आंदोलन का चेहरा आडवाणी जी थे. उन्होंने कहा कि रथ यात्रा के दौरान देशभर में जो माहौल पैदा हुआ उससे ये आंदोलन जन जन तक पहुंचा. ये पहला आंदोलन था जो उत्तर से दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक पहुंचा. यही वजह है कि आडवाणी ने रथ यात्रा सोमनाथ से शुरू की थी.
भारत रत्न के सम्मान पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं
क्योंकि ये नागरिक सम्मान इंदिरा गांधी को भी दिया जा चुका है. राजीव गांधी को भी दिया जा चुका है. वहीं पिछले दिनों पिछड़े वर्ग के सर्वमान्य नेता कर्पूरी ठाकुर को भी दिया गया है. ऐसे में इन लोगों से आडवाणी जी का योगदान कम नहीं है. वो एक बड़े आंदोलन के नायक और नेता माने जाते हैं.

