पटवारी की कार्यप्रणाली में तालमेल का अभाव

 

कटनी में कार्यकर्ताओं को धक्का मारकर बाहर निकलने से शुरू हुआ कार्यकाल अब महिला कार्यकर्ता को जूते मारकर बाहर निकलने की धमकी वाली घटना तक पहुंचा


 

भोपाल।2023 के विधानसभा चुनाव बाद मध्य प्रदेश में सरकार का चेहरा भी बदला सियासी तस्वीर भी बदली है।भाजपा में पिछले 18 साल से पार्टी का पर्याय रहे शिवराज सिंह चौहान की जगह केंद्रीय नेतृत्व ने नए चेहरे को मौक़ा देते हुए मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर सरकार की तस्वीर बदली तो विपक्षी कांग्रेस ने भी अपनी प्रादेशिक टीम में बदलाव कर दिए हैं।कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की छाया से बाहर निकलते हुए विधानसभा चुनाव हारे जीतू पटवारी को सूबे में संगठन की कमान सौंप दी।अध्यक्ष बनते है जीतू पटवारी ने प्रदेश कांग्रेस संगठन में अपने पराए के बीच बढ़ती खाई को रोकने का प्रयास नहीं करा और उनकी जल्दबाजी वाली कार्यप्रणाली से अनेकों उत्साही और लोकसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे अनुभवी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली।जिस कारण लोकसभा चुनाव दौरान ही कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल होते चले गए इन नेताओं के पलायन को रोकने की बजाय कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी "कचरा साफ हो रहा है" "गद्दार" बोल कर कांग्रेस की प्रदेश में कमजोर स्थिति को नहीं भाप पाए। बीजेपी ने स्थिति का फायदा उठाया कांग्रेस नेताओं को बगावत का इनाम दिया, भाजपा से लोकसभा टिकट दिए संगठन में भी जगह दी। विधायको को मंत्री पद से नवाजा गया।वही जीतू पटवारी अपने चिरपरिचित अंदाज और बोली के कारण लगातार जमीनी कार्यकर्ताओं पर पकड़ नही बना सके।लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह बूथ पर  डगमगा गई।नाराज होकर टूटे कार्यकर्ताओं के रोष से उठे तूफान ने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, कमलेश्वर पटेल,  कांतिलाल भूरिया तक को लोकसभा चुनाव में हारा दिया।हाल ही में हुए अमरवाड़ा उपचुनाव की हार भी बूथ स्तर पर कांग्रेस की कमजोर जमावट और जीतू पटवारी के अपरिपक्व नीति का परिणाम है।


-नहीं थम रहा जीतू पटवारी का विरोध-

मप्र कांग्रेस उद्योग व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और जीतू पटवारी के गृह जिले के कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता अजय चौरड़िया ने सोमवार 15 जुलाई को प्रेस कांफ्रेंस कर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साध दिया।चौरड़िया ने पटवारी पर सत्ता पक्ष से सांठगांठ, पार्टी को कमजोर करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष पटवारी के साथ ही पार्टी के प्रभारी महासचिव भंवर जितेंद्रसिंह को भी हटाए जाने की मांग कर डाली।बढ़ती गुटबाजी के बीच प्रदेश नेतृत्व के एकजुटता के प्रयास नाकाफी नजर आ रहे हैं।प्रदेश कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की उपेक्षाओं और मान सम्मान में ठेस पहुंचाने की मुख्य वजह भी सामने आने लगी है।अनेकों कार्यकर्ता ने जीतू पटवारी द्वारा मिलने  का समय न देने व पुराने प्रदेश पदाधिकारियों को कार्यक्रमों की सूचना न देने के आरोप लगाकर प्रदेश कार्यलाय से नाराजगी दिखाई है।भाजपा नेता नरेंद्र सलूजा ने हाल ही में एक्स पर लिखा “जीतू पटवारी जी आप भले मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिये गये है लेकिन आपकी युवक कांग्रेस , NSUI के कार्यकर्ता जैसी बचकाना हरकते अभी भी जारी है...आपको फिर से सलाह है कि कांग्रेस नेतृत्व आपको पद से हटाये , उसके पहले आप स्वयं इस्तीफ़ा देकर पदमुक्त हो जावे...क्योंकि यह जवाबदारी आपके बस की बात नहीं है...

आपके नेतृत्व में प्रदेश में कांग्रेस रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाती जा रही है...किसी योग्य अनुभवी व्यक्ति के हाथो में कांग्रेस की बागडोर सौपने की आप ख़ुद भी पैरवी करे , नहीं तो प्रदेश में कांग्रेस खोजने पर भी नहीं मिलेगी....


-जूते मारकर इसे बाहर निकलो-

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हाल में महिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में वरिष्ठ महिला कांग्रेस नेता मधु शर्मा के साथ अलका लांबा द्वारा की गई अभद्रता से सवाल उठने लगा है की जीतू पटवारी अपने वरिष्ठ नेताओं को नहीं पहचानते है? क्या प्रदेश के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का परिचय राष्ट्रीय नेतृत्व को नहीं देते है? महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष को नहीं पता था मधु शर्मा वरिष्ठ कांग्रेस नेता है?

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