रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव से भारत की बढ़ी चुनौती, व्यापार समझौते पर भी असर की आशंका

रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की स्थिति बनी हुई है। अमेरिकी कांग्रेस ने ऐसा कानून पारित किया है, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देता है। भारत भी रूसी तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है। हालांकि, यह 100 प्रतिशत टैरिफ भारत पर स्वतः लागू नहीं हुआ है; इसके लिए अमेरिकी प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जरूरी होगी।






भारत ने इस घटनाक्रम पर अपनी चिंता अमेरिका के सामने रखी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई अमेरिकी कार्रवाई के संभावित प्रभावों को लेकर भारत ने कहा है कि इससे द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। साथ ही भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

भारत के लिए रूसी तेल महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बन चुका है। 2026 में भी भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखी है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच रूसी तेल को तुरंत दूसरे स्रोतों से पूरी तरह बदलना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

इस घटनाक्रम का असर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत पर भी पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर वार्ता चल रही है। ऐसे में रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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